कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद को आजतक के ‘सीधी बात’ कार्यक्रम में सफाई पेश करनी पड़ी. पीएम मोदी द्वारा राज्यसभा में की गई तारीफ गुलाम नबी आजाद के लिए भारी पड़ गई है. कांग्रेस में चल रही उठा पटक और ऐसे समय में मोदी द्वारा सराहना ने अनेक प्रश्न खड़े कर दिए हैं. पत्रकारों के मन में हो या आम लोगों में सबके मन में एक बारंगी यह आ चूका था की आजाद भाजपा में सम्मलित होंगे. कुछ लोग दबी जबान यह भी बोल रहे थे कि मोदी की गुगली में गुलाम नबी आजाद अपना विकेट न खो दें.
ज्ञातव्य है कि गुलाम नबी 45 साल से कांग्रेस के साथ है. उनका राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष के कार्यकाल का समापन हो रहा है. पिछले दिनों एक मीडिया हॉउस को दिए इंटरव्यू में गुलाम नबी आजाद ने कहा कि किसी युवा मुस्लिम नेता के लिए पीएम बनने का सपना देखना मुश्किल है। गुलाम नबी आजाद ने कहा कि मैं निकट भविष्य की ही बात नहीं कर रहा हूं बल्कि आने वाले कुछ दशकों तक ऐसी ही स्थिति रह सकती है। किसी मुस्लिम नेता के पीएम बनने की महत्वाकांक्षा को मुश्किल बताने वाले गुलाम नबी आजाद ने 2018 में एएमयू में एक कार्यक्रम में कहा था कि उनकी ही पार्टी के हिंदू नेता अब उन्हें प्रचार में बुलाने से हिचकते हैं।
गुलाम नबी आजाद ने कहा था कि कांग्रेस के ऐसे बहुत कम हिंदू प्रत्याशी हैं, जो उन्हें प्रचार के लिए बुलाना चाहते हैं। उन्होंने कहा था कि मुझे चुनाव प्रचार के लिए बुलाने वाले हिंदू प्रत्याशियों की संख्या में तेजी से कमी आई है। उन्होंने कहा था कि इसकी वजह यह है कि लोगों को लगता है कि मेरे जाने से उनके समर्थन में कमी आ जाएगी।

छोटे लोग छोटी सोच
आजाद ने आज तक के कार्यक्रम सीधी बात में राज्यसभा में उनके और पीएम मोदी के भावुक होने को लेकर उस आतंकी घटना के बारे में बताया जिसमें गुजरात के पर्यटक मारे गए थे। क्या पीएम मोदी की ओर से तारीफ किए जाने से उन्हें पार्टी में नुकसान होगा? इसके जवाब में आजाद ने कहा, ”मैं उसकी परवाह नहीं करता। यह बहुत भावुक चीज है।” यह पूछे जाने पर कि पार्टी में कुछ लोगों को तो यह खटका होगा? आजाद ने कहा, ”छोटे लोग हैं तो मैं क्या करूं? मैंने देखा है कि इंदिरा जी अटल जी की तारीफ करती थीं और अटल जी इंदिरा गांधी की तारीफ करते थे। संजय गांधी ने अटल के खिलाफ बोला और अटल जी ने संजय के लिए अच्छी बातें कहीं। मैं इस तरह के नेताओं को मिस करता हूं।”
