सामाजिक

Jijeevisha द्वारा “आओ चलो स्कूल चले हम” अभियान का प्रारंभ

दिल्ली के एनजीओ Jijeevisha the  Humanity द्वारा न्यू सीमा पूरी में “आओ चलो स्कूल चले हम” अभियान की सफलता पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम में अप्रेल महीने संस्था द्वारा कराये गए 40 बच्चों के एडमिशन को सफलता में महत्वपूर्ण माना गया. उन बच्चों को मेघा सक्स्सेना और पूरा काली बड़ी एनजीओ के सहयोग से स्कूल बैग एवं स्टेश्नरी प्रदान किये गए.

संस्था जिजीविषा द्वारा इस अभियान में स्लम और सड़कों पर भीख मांगने वाले बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया जाता है. विभिन्न स्लम एरियाज में कार्यशालाओं का आयोजन किया जाता है. बच्चों की ट्रेनिंग दी जाती है. अभिभावकों को शिक्षा के महत्व को समझाया जाता है. जब बच्चे स्कूल जाने के लिए तैयार हो जाते हैं तब उनको पढाई की सारी सामग्री दी जाती है.

सीमा पूरी दिल्ली में आयोजित इस सेलेब्रेट कार्यक्रम में बच्चों ने परिसंवाद के माध्यम से अभियान की रुपरेखा प्रस्तुत की. संस्था Jijeevisha the  Humanity की अध्यक्ष पूजा शर्मा, मंत्री संध्या मंडल, लाइब्रेरी टीचर रेनू आदि ने इस कार्यक्रम को सफल बनाने में अपना योगदान दिया. बच्चों ने आये हुए सभी गेस्ट का वेलकम किया और सहयोग के लिए धन्यवाद् दिया.

Jijeevisha the  Humanity

ऐसे काम करती है Jijeevisha the  Humanity संस्था 

जिजीविषा संस्था की अध्यक्ष पूजा शर्मा ने बताया कि हमारा एनजीओ देश के दो राज्यों में काम करता है. दिल्ली और उत्तर प्रदेश में बेघर समुदाय, लाल बाघ झुगी, खेडा गांव, राम नगर स्लम समुदाय, मानसरोवर पार्क आदि क्षेत्रों में शिक्षा के प्रति जागरूकता अभियान चलाता है. पूजा शर्मा ने बताया कि इस क्षेत्र में सार्वजनिक शौचालय, सड़क जल निकासी व्यवस्था, पीने के पानी की समस्या आदि जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है. लोग अनपढ़ हैं और झोपड़पट्टी में रह रहे हैं और उनमें से ज्यादातर बेघर हैं.

अध्यक्ष पूजा ने कहा कि उन्हें अपनी समस्या के प्रति कोई संवेदनशीलता नहीं है. संक्रमित भोजन और आश्रय उनके लिए प्राथमिक है जबकि स्वास्थ्य द्वितीयक मुद्दा बन जाता है. क्षेत्र में नशीली दवाओं के दुरुपयोग के मामले को भी देखा जा सकता है. समग्र परिदृश्य क्षेत्र के विकास के लिए स्वास्थ्य और शिक्षा की ओर ध्यान देने की तत्काल आवश्यकता है. मानसरोवर पार्क समुदाय पिछले 6 वर्षों से मानसरोवर गार्डन मेट्रो स्टेशन के सामने स्थित है. इसमें आदिवासी लोगों के लगभग 500 परिवार शामिल हैं. इस समुदाय में करीब 1300 बच्चे हैं.  इनमें ज्यादातर भिखारी, कूड़ा बीनने वाले और अनपढ़ हैं. उनके पास बिजली और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं.

हमारी संस्था ऐसे बच्चों को अच्छा इन्सान बनाने के साथ शिक्षित और कर्मठ बनाने योगदान दे रही है. उनकी मुलभुत समस्याओं के बीच आगे बढ़ने की सोच विकसित कर खुद के द्वारा समाधान करने की स्थति बना लेने की प्रेरणा दी जाती है. हमको इसमें सफलता मिल रही है.

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