पंजाब में बुधवार को 7 नगर निगमों, 109 नगर परिषदों और नगर पंचायतों के चुनाव परिणाम आ गए. इस निकाय चुनाव में कांग्रेस की एकतरफा जीत हुई है। 2302 वार्डों में से कांग्रेस ने 1480 वार्डों में जीत दर्ज की है. कांग्रेस को 68.3% वोट मिले हैं. जबकि, कृषि कानूनों पर विरोध झेल रही भाजपा को सिर्फ 58 वार्ड में सफलता मिली. भाजपा को महज 2.67% ही वोट मिले.
इस तरह के परिणाम प्राप्त होंगे यह बीजेपी ने सोचा भी नही होगा. कृषि कानूनों का इतना असर देख भाजपा की कोर टीम भी चिंतन में पढ़ गई है. कयास तो यहाँ तक लगाये जा रहे हैं की यह निकाय चुनाव परिणाम मोदी की घर वापसी का संकेत है. वैसे इन चुनावों में कांग्रेस के आलावा किसी भी पार्टी को फायदा नही हुआ है.
भाजपा से गठबंधन से तोड़कर अलग हुई SAD भी निकाय चुनाव में दूसरे नंबर पर रही. SAD ने 322 वार्डों में जीत हासिल की है. जबकि, इसे 14.87% वोट मिल हैं. दिल्ली के CM अरविंद केजरीवाल का आंदोलनकारियों के बीच जाकर हाथ जोड़ना भी उनके काम नहीं आया. उनकी पार्टी तीसरे नंबर पर रही AAP को महज 66 वार्डों में जीत मिली। भाजपा 58 सीटों के साथ चौथे नंबर पर रही.
नरेन्द्र मोदी का जादू उतर चूका है. ऐसा मानना है माध्यम वर्ग के युवाओं का. युवाओं ने पट्रोल-डीजल और गैस की बदती कीमतों को भी ध्यान में रख कर मोदी को नकारने की बात स्वीकारी है. किसान आन्दोलन से भी भाजपा को बहुत बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है.
कृषि कानूनों का निकाय चुनाव परिणाम पर दिखा असर
चुनाव परिणाम को लेकर राजनैतिक जानकारों का कहना है कि इस पर साफ तौर पर किसान आंदोलन का असर दिखाई दे रहा है। ध्यान रहे, कांग्रेस शुरू से ही कृषि कानूनों के विरोध में खड़ी है। पंजाब सरकार की तरफ से भी इनके विरोध में किसान संगठनों की तरफ से छेड़े गए आंदोलन का समर्थन किया जा रहा है। यहां तक कि आंदोलन के दौरान दर्ज केस भी वापस लेने का फैसला सरकार ने ले लिया था। अब गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में हुई हिंसा के बाद दर्ज केस लड़ने के लिए भी प्रदेश की सरकार तैयार है। सरकार ने किसानों के मुकदमे लड़ने के लिए 70 वकीलों की टीम नियुक्त की है। ये वकील मुफ्त में किसानों के मुकदमे लड़ेंगे।
