सर्दी के दिनों में मूली की सब्जी और परांठे बड़े चाव से खाए जाते हैं. कुछ लोग उसके तीखेपन से दूर भागते हैं. धार्मिक लोग इसे तामसिक भोजन मानते हैं. इसके पीछे उनके अहिंसावादी सिद्धांत है. लेकिन मूली हमारे लिए बहुत फायेदेमंद है. उसके अन्दर ओषधिय गुण है. मूली खाने से असाध्य बीमारी केंसर से भी बच सकते हैं. आज हम उसके फाएदों के बारे में बात करेंगे.
मूली मिट्टी के भीतर पैदा होने वाली एक सब्जी है। वास्तव में यह एक परिवर्तित जड़ है । मूली दुनिया भर में उगाई और खपत की जाती है। मूली की कई किस्में हैं जो प्रजनन के आकार, रंग और समय में भिन्न होती हैं। कुछ प्रजातियाँ तेल उत्पादन के लिए भी उगाई जाती हैं।
जैन धर्म के लोग जमीन के भीतर होने वाली सब्जियों को जमीकंद मानते हैं. जमीकंद को जैन धर्म में बहु जीवी [ जीवो की बहुलता ] माना जाता है. जो जमीकंद खाता है उसको उन जीवो की हिंसा करनी पड़ती है इसलिए जैन आगमों में इनका निषिद्ध किया गया है. वैसे जैन धर्म हरियाली मात्र में जिव मानते हैं. पर उनका कहना है सब्जी के बिना जीवन चल नही सकता इसलिए उन सब्जियों को खाना आवश्यक हो जाता है. जमीकंद के बिना जीवन चल सकता है इसलिए हिंसा की बहुलता से बचा जा सकता है.
शास्त्रीय मतानुसार उसमें प्रोटिन, कर्बोहायड्रेट,फॉस्फरस और लोह होता है।उसकी राख क्षारयुक्त होती है।भोजन में कच्ची मुली खाना चाहिए। कोमल मुली खाने से अच्छी भूख लगती है।अन्न भी अच्छी तरह से पचता है। मुली के पत्ते पचने में हल्के, रुची निर्माण करनेवाले और गरम होते हैं। वह कच्चे खाए तो पित्त बढता है, पर यही सब्जी घी में बनाई तो सब्जी के पौष्टिक गुणधर्म में बढ़ोतरी होती है। सावन मास में मुली खाना अच्छा होता है।
कोमल मूली का अचार भी बनाया जाता है। बहुत से लोग मुली के पत्ते काटकर उसमें चने का आटा डालकर स्वादिष्ट सब्जी बनाते हैं। कुछ लोग उसकी मुठिया (मुटकुळी)और थालिपीठे भी बनाते हैं।
मूली के सलाद के लिए सफेद मुली स्वच्छ धोकर कद्दूकस करके या कीसकर उसमें नारीयल का कीस और बारीक कटी हरी धनिया मिक्स करे इसके उपरांत स्वादनुसार मिश्रण में नमक और शक्कर डालें।कम तेलपर जिरे, हिंग, राई और कढीपत्ते की बघार करके वह किसे हुए मूलीपर डाले इस सलाद में हल्दी न डाले। इस प्रकार लाल मुली की सलाद भी बना सकते हैं। इस सलाद में मीठा दही डालने से स्वाद और बढता है।
सब्जी बनाने के लिए मूली पत्तेसहीत धोकर बारीक काट ले। प्याज़ बारीक काट ले उसमें दो चमचे तुअर की दाल गरम पानी में भिगोकर रखे। तेल की बगार में लहसुन की कली पीसकर डाले। उस पर बघार में हरी मिर्च, हल्दी, तूअर दाल और बारीक कटा प्याज़ डाल कर बघार अच्छी तरह भूने। अच्छी तरह भूनी प्याज़ पर मूली की कटी सब्जी डाले। थोडा पानी का छिडकाव करके पहले पर ढक्कन रखे। ढक्कन पर पानी डालकर भाप में सब्जी पकाएं। सब्जी पकने पर उसमें थोडी शक्कर वे व खोपरे का तेल डालें।
अनेक लोगों को मूली के थालिपीठ(मुठीया) रुचिकर लगती है। दो मध्यम आकार की मूली किस ले व रस निचोड़ ले। किस निचोडने पर उसका तेज कम होता है। किस में एक बारीक कटा प्याज़, एक कटोरी चावल का आटा, ज्वार का आटा, बेसन, अाधा चमचा धनिया जिरे पावडर, पाव चम्मच हल्दी अर्धा चम्मच शक्कर, नारीयल के टुकड़े,बारीक कटी हरी मिर्च अाधी कटोरी बारीक कटी हरी धनिया और स्वाद के अनुसार नमक ऐसी सब सामग्री एकत्र करके छान ले आवश्यकतानुसार पानी डालकर मिश्रण गेंद ले प्लास्टिक के कागजपर थालीपीठ बनाएं।
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