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बथुआ में है चमत्कारिक औषधीय गुण, ऐसे इस्तेमाल करें

सर्दी के मौसम में बथुआ प्राय:कर हर घर में उपयोग किया जाता है. ज्यादातर इसकी सब्जी बनाते हैं. पर जिसका उपयोग होता है उसका क्या फायदा है और क्या नुकशान ? इस पर ध्यान कम ही दिया जाता है. बथुआ भी एक ऐसी सब्जी है जिसके गुणों से अधिकतर लोग अनजान हैं। ये छोटा-सा दिखने वाला हराभरा पौधा काफी फायदेमंद होता है, सर्दियों में इसका सेवन कई बीमारियों को दूर रखने में मदद करता है।

कुछ घरों में बथुआ के परांठे और रायता तो चटकारे लगाकर खाए जाते हैं. वैसे बथुआ के अनेक पदार्थ बनाये जाते है. इसके भुजिया, कड़ी भी काफी रूचि से खाई जाती है. अनेकानेक खाने की वस्तुओं में कम आने वाले इस बथुए के बारे में हम चर्चा करेंगे. इसके खाने से क्या फायदा है और कब नही खाना चाहिए यह इस लेख बताया जायेगा. अगर कब खाना और कब नही खाना इसका पता नही है तो नुकसान ज्यादा हो जाता है.

बथुए में आयरन प्रचुर मात्रा में होता है, बथुआ न सिर्फ पाचनशक्ति बढ़ाता बल्कि अन्य कई बीमारियों से भी छुटकारा दिलाता है। गुजरात में इसे चील भी कहते है। बथुआ गुणों की खान होने पर भी बिना किसी विशेष परिश्रम और देखभाल के खेतों में स्वत: ही उग जाता है। एक डेढ़ फुट का यह हराभरा पौधा अनेक बिमारियों से दूर रखने में सहायक होता है. इसकी पत्तियों में सुगंधित तैल, पोटाश तथा अलवयुमिनॉयड पाये जाते हैं। दोष कर्म की दृष्टि से यह त्रिदोष (वात, पित, कफ) को शांत करने वाला है। आयुर्वेदिक विद्वानों ने बथुआ को भूख बढ़ाने वाला पित्तशामक मलमूत्र को साफ और शुद्ध करने वाला माना है।

इन रोगों में उपयोगी है बथुआ

  • बथुआ लीवर के विकारों को मिटा कर पाचन शक्ति बढ़ाकर रक्त बढ़ाता है। शरीर की शिथिलता मिटाता है। लिवर के आसपास की जगह सख्त हो, उसके कारण पीलिया हो गया हो तो छह ग्राम बथुआ के बीज सवेरे शाम पानी से देने से लाभ होता है।
  • नियमित कब्ज वालों को इसके पत्ते पानी में उबाल कर शक्कर (चीनी नहीं) मिला कर पीने से बहुत लाभ होता है।
  • लाल बथुए के सेवन से वात, पित्त, कफ के प्रकोप का नाश होता है और बल-बुद्धि बढ़ती है।
  • लाल बथुआ बूंद-बूंद पेशाब आने की तकलीफ में भी लाभकारी होता है। पत्तों के रस में मिश्री मिला कर पिलाने से पेशाब खुल कर आता है।
  • टीबी की खांसी में इसको बादाम के तेल में पकाकर खाने से लाभ होता है।
  • इसका पानी से तिल्ली की सूजन में लाभ होता है। सूजन अधिक हो तो उबले पत्तों को पीसकर तिल्ली पर लेप लगाएं।
  • लाल बथुआ हृदय को बल देने वाला, फोड़े-फुंसी, मिटाकर खून साफ करने में भी मददगार है।
  • इसका रस जरा-सा नमक मिलाकर दो-दो चम्मच दिन में दो बार पिलाने से पेट के कीड़ों से छुटकारा मिलता है।
  • अरुचि, अर्जीण, भूख की कमी, कब्ज, लिवर की बीमारी पीलिया में इसका साग खाना बहुत लाभकारी है। सामान्य दुर्बलता बुखार के बाद की अरुचि और कमजोरी में इसका साग खाना हितकारी है। धातु दुर्बलता में भी बथुए का साग खाना लाभकारी है। तिल्ली की बीमारी और पित्त के प्रकोप में इसका साग खाना उपयोगी है। इसका साग खाने से बवासीर में लाभ होता है। पखाना खुलकर आता है। दर्द में आराम मिलता है।

बीमारी के आलावा भी उपयोगी

आपने देखा यह आंखों के लिए उपयोगी तथा पेट के कीड़ों का नाश करने वाला है। यह पाचनशक्ति बढ़ाने वाला, भोजन में रुचि बढ़ाने वाला पेट की कब्ज मिटाने वाला और स्वर (गले) को मधुर बनाने वाला है। गुणों में हरे से ज्यादा लाल बथुआ अधिक उपयोगी होता है। इसके  बीजों को सिला पर पीस कर उबटन की तरह लगाने से शरीर का मैल साफ होता है, चेहरे के दाग धब्बे दूर होते हैं। इसके काढ़े से रंगीन तथा रेशमी कपड़े धोने से दाग धब्बे छूट जाते हैं और रंग सुरक्षित रहते हैं।

इसमें रखें सावधानी

अति से सब जगह बचना चाहिए. यह एक कहावत है. पर बहुत ही उपयोगी है. यह कहावत यहाँ भी लागु होती है. यह हर तरह से उपयोगी  सब्जी है परन्तु एक लिमिट में ही खाना चाहिए. मात्र को ध्यान में रख कर खाई हुई ओषधि ही बीमारी का इलाज करती है.

गर्भवती महिला को इसका सेवन नही करना चाहिए. यह गर्भ को गिरा सकता है.

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