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मोदी सरकार पर संघ की लगाम, गांधीनगर में बन रहा एजेंडा

आज मंगलवार को गुजरात के गांधीनगर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का एक ऐसा सम्मलेन प्रारम्भ हुआ है जिसमे मोदी सरकार के निर्णयों की समीक्षा होगी. संघ और इससे जुड़े विभिन्न संगठनों के तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में नरेंद्र मोदी सरकार की योजनाओं, नीतियों और कार्यों का मूल्यांकन किया जाएगा और भविष्य की योजनाओं को लेकर मसौदा भी तैयार किया जाएगा. माना जा रहा है कि बैठक में मोदी सरकार में फेरबदल को लेकर भी चर्चा की जा सकती है. लोगों में चर्चा है कि मनमोहन सरकार के समय 10 जनपथ निर्णय लेता था तो यहाँ अन्दर खाते संघ के दवाब में सरकार काम कर रह है.

संघ परिवार के इस राष्ट्रीय सम्मेलन का मुख्य एजेंडा राम मंदिर फंड कैंपेन, बंगाल चुनाव और किसान आंदोलन पर चर्चा करना है. हालांकि, ये भी उम्मीद की जा रही है कि इस दौरान बीजेपी अध्यक्ष नड्डा को मोदी कैबिनेट के संभावित फेरबदल पर आरएसएस से इनपुट भी मिल सकता है.

इस सम्मेलन में संघ से जुड़े 25 संगठनों के तकरीबन 150 शीर्ष नेता भाग ले रहे हैं. आरएसएस के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख अरुण कुमार ने बताया, “इस बैठक में सभी प्रतिनिधि विभिन्न योजनाओं और नीतियों के बारे में देश भर से मिली प्रतिक्रियाओं पर चर्चा करेंगे, भविष्य की योजनाओं के लिए इनपुट देंगे और सुधार के तरीके सुझाएंगे.”

पहले दिन कृषि कानून पर चर्चा

बैठक के पहले दिन भारतीय किसान संघ के जरिए कृषि कानूनों को लेकर हो रहे विरोध और कानून को रद्द किए जाने की मांग को लेकर चर्चा हुई. बैठक के दौरान कानून की सही और सच्ची जानकारी घर-घर तक पहुंचाने की बात हुई जिससे लोगों में इसका विरोध कम हो. आज की बैठक में आगामी बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर भी बातचीत हुई. आरएसएस बंगाल में किस तरह से काम करे जो सीधा बीजेपी के पक्ष में जाए इस मुद्दे पर भी चर्चा हुई.

सम्मेलन के दूसरे दिन राम मंदिर मुद्दे पर कल बुधवार को चर्चा होगी, जिसमें राममंदिर निर्माण को लेकर रामजन्मभूमि ट्रस्ट के चंपतराय भी शामिल होंगे. राममंदिर का निर्माण कब से शुरू होगा, मंदिर निर्माण के लिए पैसे चंदे के जरिए कैसे और कब तक एकत्र करना है, इसे लेकर भी बातचीत होगी.

मोदी सरकार के मंत्रीमंडल फेरबदल पर लगेगी मुहर

इस सम्मलेन के दौरान ही मोहन भागवत और जे पी नड्डा की मुलाकात होगी. इसमें मंत्रिमंडल के चेहरों पर भागवत द्वारा मोहर लगाई जाएगी. उम्मीद की जा रही है कि लोकजनशक्ति पार्टी (LJP) नेता रामविलास पासवान के निधन के बाद खाली हुए पद की जिम्मेदारी किसी नए व्यक्ति को दी जाएगी. पासवान के पास खाद्य और उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय की जिम्मेदारी थी, जिसे फिलहाल रेलवे और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल संभाल रहे हैं.

इसके अलावा, बिहार विधानसभा चुनाव के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल में जनता दल यूनाइटेड की भागीदारी की भी संभावना है. बिहार में विधानसभा चुनाव के बाद बीजेपी के वरिष्ठ नेता सुशील मोदी की डिप्टी सीएम पद पर वापसी नहीं हुई. दूसरी ओर मार्च 2019 में बीजेपी में शामिल हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया को भी केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह मिलने का इंतजार है.

हालांकि, अभी इस बात पर कोई स्पष्टता नहीं है कि पीएम मोदी मंत्रिमंडल में फेरबदल कब करेंगे. सूत्रों के मुताबिक, कम से कम 14 जनवरी की सुबह 08.15 बजे से पहले ऐसा होने की संभावना नहीं है, क्योंकि 14 जनवरी की सुबह तक “खरमास” चल रहा है, जो कि किसी शुभ कार्य के लिए अशुभ माना जाता है.

किसान आंदोलन और बंगाल

आपको बता दें कि “समन्वय” बैठक में सरकार के कामकाज पर चर्चा होती है कि सरकार ने पूर्व में बनाए गए रोडमैप का पालन किया है या नहीं. इसके साथ ही भविष्य के लिए योजना बनाई जाती है. बीजेपी अध्यक्ष और भागवत जैसे नेता पर्यवेक्षक के रूप में चर्चा में हस्तक्षेप करते हैं. इन चर्चाओं में कोई भाषण नहीं होता.

राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान भारतीय किसान संघ, स्वदेशी जागरण मंच, भारतीय मजदूर संघ, वनवासी कल्याण आश्रम और विश्व हिंदू परिषद पर खास ध्यान केंद्रित किया जाएगा.

आरएसएस अपने सभी संगठनों के साथ मौजूदा किसान आंदोलन पर प्रतिक्रियाओं की जानकारी लेगा और इस पर चर्चा करेगा. भारतीय किसान संघ (BKS) विभिन्न राज्यों के किसानों के बीच अपनी पहुंच के मुताबिक जानकारी देगा ताकि ये सुनिश्चित किया जा सके कि विरोध पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों से पूरे भारत में न फैले.

राम मंदिर के लिए डोनेशन कैंपेन

बैठक में आरएसएस और इसके सहयोगी संगठनों के विस्तार को लेकर कार्यक्रमों पर भी चर्चा होने की संभावना है. अरुण कुमार ने कहा कि चर्चा के एजेंडे में राम मंदिर निर्माण के लिए डोनेशन और डोर-टू-डोर कैंपेन भी शामिल होंगे.

अयोध्या में राम मंदिर की योजना और निर्माण में सक्रिय भूमिका निभा रहा विहिप बैठक में इससे जुड़ी जानकारियां देगा. आरएसएस की योजना है कि राम मंदिर के लिए जन अभियान चलाकर बीजेपी के प्रति एक सकारात्मक भावना पैदा की जाए ताकि 2022 में यूपी विधानसभा चुनाव और 2024 में लोकसभा चुनाव के दौरान बीजेपी के सामने आने वाली चुनौतियों का सामना किया जा सके.

अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण कार्य जनवरी के अंत तक शुरू होने की संभावना है और इसके निर्माण में 36-39 महीने लग सकते हैं. इसका मतलब है कि जब तक मंदिर तैयार होगा तब तक प्रधानमंत्री मोदी अपने तीसरे कार्यकाल की तैयारी कर रहे होंगे. शिवसेना जैसे प्रतिद्वंद्वियों ने पहले ही यह संकेत दे दिया है कि आरएसएस और बीजेपी राम मंदिर के लिए धन संग्रह का उपयोग राजनीतिक अभियान के रूप में कर रहे हैं.

अर्थव्यवस्था और मजदूरों पर फोकस

इस बैठक में स्वदेशी जागरण मंच और भारतीय मजदूर संघ जैसे आरएसएस से जुड़े संगठन अर्थव्यवस्था पर भी इनपुट देंगे ताकि आत्मनिर्भर भारत कार्यक्रम और मजदूरों से जुड़े मुद्दों की खामियों को दूर किया जा सके.

अहमदाबाद पहुंचने के बाद सोमवार को बीजेपी अध्यक्ष नड्डा ने गुजरात के नेताओं के साथ तीन घंटे तक बैठक की. सूत्रों ने कहा कि गुजरात स्थानीय निकाय चुनाव आने वाले हैं जिस पर चर्चा के लिए बैठक बुलाई गई थी. ये चुनाव मुख्यमंत्री विजय रूपाणी और बीजेपी के लिए लिटमस टेस्ट होंगे.

ये चुनाव नवंबर में होने थे लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण इन्हें टाल दिया गया, अब इनके फरवरी में होने की संभावना है.

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