दिल्ली : Acharya Mahashraman News
अपनी अहिंसा यात्रा द्वारा मानव कल्याण का महनीय कार्य करने वाले जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें पट्टधर आचार्यश्री महाश्रमण का आज पूर्वी दिल्ली क्षेत्र में मंगल पदार्पण हुआ। अष्ट वार्षिक यात्रा में लाखों-लाखों लोगों को सद्भावना, नैतिकता एवं नशामुक्ति की प्रेरणा प्रदान करने वाले शांतिदूत आचार्य महाश्रमण के स्वागत में दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष श्री रामनिवास गोयल भी उपस्थित थे। कई किलोमीटर पैदल चलकर विधानसभा अध्यक्ष ने इस मानव कल्याणकारी अहिंसा यात्रा में अपनी सहभागिता दर्ज कराई। इतने लम्बे अंतराल के बाद अपने क्षेत्र में आराध्य के पदार्पण से आह्लादित श्रद्धालुओं का उत्साह बुलंद जयघोषों में स्पष्ट नजर आ रहा था।
प्रातः सूर्याेदय के पश्चात अणुव्रत भवन से विहार कर यमुना नदी पार पूज्यप्रवर का जैसे ही पदार्पण हुआ गांधीनगर, कृष्णानगर, शाहदरा आदि क्षेत्र का श्रावक समाज विशाल जुलूस के साथ गुरुवर की अगवानी कर रहा था। इस मौके पर क्षेत्रीय विधायक आदि अन्य गणमान्य लोग भी आचार्यश्री के स्वागत में उपस्थित थे। शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमण स्थान-स्थान पर श्रद्धालुओं को आशीष प्रदान करते हुए कृष्णानगर स्थित तेरापंथ भवन में पधारे और वहां उपस्थित लोगों को प्रेरणा पाथेय प्रदान किया। इस अवसर पर संबंधित पदाधिकारियों ने अपने विचार रखे। तत्पश्चात कुल 10 किलोमीटर का विहार कर आचार्यश्री विवेक विहार के ओसवाल भवन में प्रवास हेतु पधारे। यहां भी श्रद्धालुओं द्वारा आचार्यश्री का भव्य स्वागत किया गया।
स्वयं का ज्ञान होता है नेत्र के समान: Acharya Mahashraman News
शाहदरा क्षेत्र के विवेक विहार स्थित ओसवाल भवन में धर्मसभा को पावन प्रेरणा प्रदान करते हुए आचार्य श्री ने कहा कि आदमी के जीवन में ज्ञान का परम महत्व होता है। ज्ञान एक प्रकाशपुंज के सामन है। जिस प्रकार मानव शरीर में नेत्र का विशेष महत्त्व होता है, उसी प्रकार आदमी के जीवन में ज्ञान का परम विशेष महत्त्व है। स्वयं का ज्ञान आदमी के नेत्र के समान होता है। जिस प्रकार जिसके पास स्वयं का नेत्र न हो तो वह भला दुनिया को कैसे देख पाएगा? उसी प्रकार जिस व्यक्ति के पास स्वयं का ज्ञान न हो तो आदमी भला क्या कर सकता है। ज्ञान का विकास हो, इसके लिए निरंतर प्रयास करना चाहिए। ज्ञान आदमी के जीवन की वह ज्योति है, जिससे उसका जीवन पथ आलोकित होता है।

पूज्यप्रवर ने आगे कहा – आदमी के जीवन में अध्यात्म विद्या का भी अपना महत्त्व है। भूगोल, खगोल, विज्ञान आदि विभिन्न विषयों के ज्ञान के साथ आध्यात्म भी जरूरी है। अध्यात्म विद्या को जानकर अपने जीवन को धर्म और संस्कार से भावित करे तो जीवन की दशा और दिशा सही हो सकती है। जीवन में ज्ञान के विकास के साथ सच्चाई, ईमानदारी, नैतिकता हो तो आदमी के सम्मान में वृद्धि हो सकती है।
आगमन के संदर्भ में आचार्यश्री ने कहा की अहिंसा यात्रा के दौरान पुनः दिल्ली आना हो गया। कुछ दिनों पूर्व यहां शासनमाता का भी महाप्रयाण हो गया। आज पूर्वी दिल्ली में भी आना हुआ है। यहां के लोगों में भी धार्मिक चेतना विकास होता रहे। राजनीति भी सेवा का माध्यम है। इससे जुड़े लोगों में धर्म का प्रभाव बना रहे।
आचार्यश्री के दर्शन को छोड़ी विधानसभा की कार्यवाही
आचार्यश्री के साथ कुछ दूर अहिंसा यात्रा में पैदल चले और आचार्यश्री के आगमन से उत्साहित दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष श्री रामनिवास गोयल ने कहा कि यह मेरा परम सौभाग्य है कि आचार्यश्री महाश्रमणजी के छठवीं बार दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। आज जारी विधानसभा को छोड़कर भी मैं आपके दर्शन को पहुंच पाया, यह आपकी कृपा का ही प्रसाद है।
समाचार पत्र पंजाब केसरी की डायरेक्टर श्रीमती किरण चोपड़ा ने कहा कि मैं स्वयं को अत्यंत सौभाग्यशाली समझती हूं कि मुझे आज आप जैसे महान संत के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करने व आपके स्वागत में बोलने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। आप जैसे विरल संतों के आधार पर ही यह धरा टिकी हुई है। आपकी प्रेरणा से सभी जगह सद्भावना, नैतिकता और नशामुक्ति का विकास हो रहा है। आप जैसे संत सतत सान्निध्य प्राप्त होना भी विरल है।

अभिवंदना के क्रम में ओसवाल समाज के अध्यक्ष श्री बाबूलाल दूगड़, शाहदरा सभा के अध्यक्ष श्री राजेन्द्र सिंघी, मंत्री सुरेश भंसाली, उपाध्यक्ष श्री तेजकरण बैद, महिला मंडल की संयोजिका श्रीमती मंजू बांठिया, विकास मंच के मुख्य ट्रस्टी श्री धरमचन्दजी सेठिया ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। तेरापंथ समाज शहादरा, ओसवाल यूथ क्लब, ज्ञानशाला के प्रशिक्षक व प्रशिक्षिकाओं व बालिका मुस्कान ने पृथक-पृथक गीत का संगान किया। कार्यक्रम में मुनि कमलकुमारजी ने आचार्यश्री से 44वें वर्षीतप का प्रत्याख्यान किया।
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