कंगारुओं के नाम से विख्यात आस्ट्रलिया के खिलाडियों द्वारा भारत को हलके में लेना भारी पढ़ गया. इंडियन शेरो ने उनके जबड़ो से जीत छीन ली. चोट के कारण आधी से ज्यादा टीम घायल थी. यह देख आस्ट्रलिया नये इंडियन शेरो को तव्वजों नहीं दी. इसका खामियाजा सीरिज हार से चुकाना पड़ा.
ऑस्ट्रेलिया ने पहली पारी में मार्नस लाबुशैन के 108, टिम पेन के 50 रनों के दम पर 369 रन बनाए थे. भारतीय टीम ने युवा बल्लेबाजों के दम पर अपनी पहली पारी में 336 रन बनाए थे. पहली पारी के आधार पर ऑस्ट्रेलिया दूसरी पारी में 33 रनों की बढ़त के साथ ही उतरी थी. दूसरी पारी में मोहम्मद सिराज के पांच और शार्दूल ठाकुर के चार विकेट के कारनामे से भारत ने ऑस्ट्रेलिया को 294 रनों पर समेट दिया. फिर भी भारत को 328 रनों का मुश्किल लक्ष्य मिला था. भारत ने हालांकि इस लक्ष्य को आसान बना दिया और एक बेहतरीन जीत हासिल कर इतिहास रचा. चौथे दिन भारत ने 1.5 ओवर ही खेले थे और चार रन बनाए थे. बारिश के कारण दिन का खेल खत्म हो गया था.
पांचवें और आखिरी दिन भारत को जीत के लिए 324 रन चाहिए थे. रोहित शर्मा के सुबह जल्दी सातवें ओवर में सात के निजी स्कोर पर आउट होने के बाद यह चुनौती और मुश्किल हो गई. लेकिन गिल, पंत जैसे युवा कंधों ने पुजारा जैसे अनुभवी खिलाड़ी के साथ मिलकर टीम को जीत दिलाई.
गिल की शानदार पारी
रोहित के आउट होने के बाद गिल और पुजारा ने 114 रनों की साझेदारी कर भारत की जीत की उम्मीदों को जगा दिया. भारत ने पहले सत्र में रोहित का विकेट ही खोया था. युवा बल्लेबाज गिल अपने तीसरे टेस्ट मैच में ही शतक की ओर बढ़ रहा था लेकिन नौ रन पहले ही नाथन लॉयन ने गिल को स्टीव स्मिथ को आउट कर भारत को 132 के कुल स्कोर पर दूसरा झटका दिया. गिल ने 146 गेंदों का सामना करते हुए आठ चौके और दो छक्कों की मदद से 91 रन बनाए.
कप्तान अजिंक्य रहाणे 24 रन ही बना सके और 167 के कुल स्कोर पर पैट कमिंस की गेंद पर आउट हो गए. वह हालांकि भारत को जीत दिलाने की मानसिकता से मैदान पर आए थे. यह अलग बात है कि वह अपने प्रयास में सफल नहीं हो सके. कप्तान के जाने के बाद पंत ने मैदान पर कदम रखा. चायकाल तक भारत ने तीन विकेट खोकर 183 रन बना लिए थे. आखिरी सत्र में भारत को जीत के लिए 145 रनों की दरकार थी.

पंत का कौसल काम आया
चायकाल के बाद भारत को एक और बड़ा झटका लग गया. अर्धशतक पूरा करने के बाद पुजारा 228 के कुल स्कोर पर कमिंस का शिकार बन गए. पुजारा और पंत ने चौथे विकेट के लिए 61 रन जोड़े. पुजारा ने 211 गेंदों पर 56 रन बनाए और सात चौके मारे. पुजारा के जाने के बाद पंत ने थोड़ी आक्रामकता दिखानी शुरू की. इसी बीच मयंक अग्रवाल (9) लूज शॉट खेल कर कमिंस की गेंद पर मैथ्यू वेड को शॉर्ट एक्सट्रा कवर पर कैच दे बैठे.
पंत हालांकि बिल्कुल भी घबराए नहीं. शांत रहते हुए उन्होंने वॉशिंगटन सुंदर (22) के साथ एक और 53 रनों की अहम साझेदारी कर भारत को जीत की दहलीज पर पहुंचा दिया. यही वो साझेदारी थी, जिसने भारत को जीत की दहलीज तक पहुंचाया.
भारत को जीत के लिए जब 10 रन चाहिए थे तब सुंदर भी आउट हो गए. शार्दूल ठाकुर भी दो रन बनाकर आउट हो गए. पंत ने चौका मार भारत को ऐतिहासिक जीत दिलाई. पंत 89 रनों पर नाबाद रहे. उन्होंने 138 गेंदों का सामना करते हुए नौ चौके और एक छक्का मारा. पंत को उनकी मैच जिताऊ पारी के लिए मैन ऑफ द मैच चुना गया. जीत के साथ ही युवाओं ने इंडियन शेरो की दहाड़ का अहसास कंगारुओं को कराया.
ऑस्ट्रेलिया के लिए कमिंस ने चार. उन्हें मैन ऑफ द सीरीज चुना गया. अपना 100वां टेस्ट खेल रहे लॉयन ने दो और हेजलवुड ने एक विकेट लिया.
