राजस्थान के पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट इन दिनों राष्ट्रिय मुद्दों पर बीजेपी को घेरते रहे हैं. किसान आन्दोलन हो या कोरोना महामारी वे मुखरता से केंद्र सरकार को आड़े हाथों लेते हैं. कयास लगाये जा रहे हैं की इसमें कोई राज की बात तो नही हैं. सचिन पायलट को कहीं बड़ी जिम्मेदारी मिलने की और संकेत तो नही है. कुछ भविष्य वक्ता तो उनके राष्ट्रिय अध्यक्ष बनने तक की भविष्यवाणी कर रहे हैं. राजस्थान कांग्रेस को फिर से खड़ा करने में सक्रीय योगदान देने वाले पायलट को सरकार से अलग कर दिया गया था. लेकिन जब से कांग्रेस का राष्ट्रिय अध्यक्ष चुने जाने की प्रक्रिया प्रारंभ हुई है तब से वो राष्ट्रिय मुद्दों पर मुखर हो रहे हैं. आज भी उन्होंने मोदी सरकार पर हमला बोला.
उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा अहंकार में बनाए गए कानूनों को देश के किसानों के हित में वापस लेना चाहिए. पायलट ने देश भर में किसान आंदोलित (Farmers Protest) हैं और इस कडाके ठंड में पिछले डेढ़ महीने से अधिक समय से अनगिनत किसान धरना दे रहे हैं और गांधीवादी तरीके से अपनी मांग को मनवाने की कोशिश कर रहे हैं.
सचिन पायलट कहा कि सरकार के साथ 9 दौर की वार्ता हो चुकी है लेकिन बेनतीजा रही. सरकार की मंशा नतीजा निकालने की नहीं है. वो सिर्फ किसानों को थकाना चाहती है. यह केंद्र सरकार की एकतरफा कार्यवाही है, जिसका किसान विरोध कर रहे हैं. टोंक में किसानों को संबोधित करते हुए पायलट ने कहा कि आज हमारी कोशिश है कि देश में 24 राजनीतिक पार्टियां एकत्र होकर उन किसानों का समर्थन करें. यह राजनीतिक मांग नहीं है, किसानों के भविष्य और उनके हित को देखते हुए पूरे देश ने यरकार से तीनों कानून (Farm Laws) वापस लेने की मांग करने का संकल्प लिया है.
पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट पिछले दिनों केंद्र सरकार के कृषि कानून के विरोध में किसानों के बीच बैलगाड़ी पर बैठकर पहुंचे थे. कृषि कानून के विरोध में चलाये जा रहे कार्यक्रम को लेकर सचिन पायलट ने टोंक ज़िले की 11 ग्राम पंचायतों का दौरा किया. सचिन पायलट ने किसानों से जन संवाद करते हुए कृषि कानून को मोदी सरकार की किसानों को बर्बाद किये जाने की सोची -समझी रणनीति बताया.
सचिन पायलट ने केंद्र की भाजपा सरकार पर घमंडी होने का आरोप लगाते हुए कहा कि एक माह से भी अधिक समय से इस भीषण सर्दी में हज़ारों किसान सड़कों पर डेरा डाले हुए हैं लेकिन सरकार ना तो इस काले कानून को वापस ले रही है ना ही एमएसपी पर कोई लिखित आश्वासन दे रही है. पायलट ने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार के दिल में कितनी खोट है इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इन कानूनों को लाने से पहले राजनीतिक पार्टियों से कोई चर्चा नहीं की, ना ही किसान संगठनों के साथ बैठक की.
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