हरियाणा के उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद तेवर ढीले पड़ गए हैं. शाह से क्या बात हुई कि उनको शांत होना पढ़ गया. दुष्यंत चौटाला ने मंगलवार रात्रि में अमित शाह से मुलाकात की थी. मुलाकात से पहले अपने आवास पर खुद की पार्टी के विधायको के साथ मीटिंग की. मीटिंग में विधयाको ने सीधे कहा कि नए कानूनों से गठबंधन सरकार को नुकसान हो रहा है. इन्हें केंद्र सरकार आंख बंद कर निरस्त कर दे. किसान आंदोलन से राजनीतिक तौर पर नुकसान उठाना पड़ सकता है. किसान नए कानूनों पर कुछ भी सुनने को तैयार नहीं हैं. उनके गुस्से को सीएम व मंत्रियों के कार्यक्रम में साफ देखा जा चुका है. डिप्टी सीएम के कार्यक्रम स्थल के पास बने हेलीपैड को भी वे उखाड़ चुके हैं. सरकार वर्तमान में उपजे हालात को समझे और आंदोलन को जल्द खत्म कराए.
दुष्यंत पार्टी के विधयाको की उग्र भावना को समझ रहे थे. उन्होंने विधयाको को साफतौर पर कह दिया था कि जजपा किसानों की पार्टी है. वह भी जल्द आन्दोलन ख़त्म कराने के पक्ष में है. आपको बता दें कि हरियाणा में किसान आन्दोलन के चलते सरकार खतरे में है. सोमवार को इनेलो के प्रमुख अभय चौटाला ने एक चिट्ठी लिखकर खट्टर का विरोध किया है और कहा है कि अगर 26 जनवरी तक किसानों की बात नहीं मानी जाती है तो उनकी इस चिट्ठी को ही इस्तीफा माना जाए. उन्होंने कहा था कि वो ऐसी संवेदनहीन विधानसभा में नहीं रहना चाहते. अब उनकी इस धमकी के बाद और ज्यादा विधायकों के बीच दबाव बन गया है.
चौटाला विधयाकों के दवाब के बाद और अपनी पार्टी के वजूद को बनाये रखने के लिए किसानों के पक्ष में बयान दे रहे थे. वे अनेक बार कृषि कानून ख़त्म करने के पक्ष को जाहिर कर चुके हैं. मुसीबत इसलिए भी है क्योंकि विपक्षी पार्टी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने सोमवार को कहा कि कांग्रेस खट्टर सरकार के खिलाफ सदन में अविश्वास प्रस्ताव लाएगी. उन्होंने अभय चौटाला का समर्थन भी किया था.
उप-मुख्यमंत्री चौटाला इस बात से भली भांति परिचित हैं कि चाचा और इनेलो प्रमुख अभय चौटाला किसानों के हितेषी बन जाते हैं तो जजपा को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा. वे एक तरफ खाई और एक तरफ कुआं वाली कहावत में अपने आपको देख रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट के नए कानूनों के अमल पर रोक लगाने व चार सदस्यीय समिति गठित करने के बावजूद आंदोलनरत किसानों के तेवर नरम नहीं पड़े हैं. इससे जननायक जनता पार्टी पर दबाव बढ़ रहा है. जजपा किसानों से जुड़ी पार्टी है और उसके कुछ विधायक आंदोलन के समर्थन में हैं. आंदोलन के और लंबा खिंचने पर जजपा विधायकों को पार्टी का नुकसान होता दिख रहा है. दुष्यंत चौटाला विधायकों के लगातार संपर्क में हैं।
गृहमंत्री के साथ बैठक में उपमुख्यमंत्री सारी बातों पर चर्चा की है. किसान आंदोलन से उत्पन्न राजनीतिक हलचल के बीच हुई यह बैठक बेहद अहम मानी जा रही है. कयास लगाये जा रहे हैं कि दोनों में हुई मीटिंग में चौटाला को पुराने केस की याद दिला कर चुप कर दिया गया है. तो कुछ लोग इस उम्मीद में है कि दुष्यंत की बात पर शाह ने सहमती जताई है और जल्द समाधान का आश्वासन दिया है.
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