श्रमण संघीय एकता के अग्रदूत प्रसिद्ध वक्ता जैन दिवाकर Jain Sant गुरुदेव श्री चौथमल जी म सा की 126 वी दीक्षा जयंती एवं संथारा साधिका महाश्रमणी रत्ना गुरुणी मैया श्री शांता कुमारी जी म. सा. की 65 वीं दीक्षा जयंती पर सोमवार को कार्यक्रम आयोजित किया गया. जोधपुर धरा पर साध्विश्री मनिषाश्री जी म. सा. साध्वी श्री पूर्वाश्री जी म. सा. के सानिध्य म़े आयोजित इस जयंती समारोह कार्यक्रम में भक्तों ने बढचढ कर भाग लिया.
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए साध्वी मनीषाश्री ने कहा कि Jain Sant गुरुदेव चौथमल जी म. सा. महान संत थे. उन्होंने जैन धर्म को जन जन तक पहुँचाने में बहुत श्रम किया. वे हर जरुरत मंद के सहारा थे. उनको जैन दिवाकर के नाम से जाना जाता था. उनको यह पदवी जैन शासन को दीपाने में लगे श्रम और सूझबूझ के कारन प्रदान की गई थी. साध्वी मनीषाश्री ने संथारा साधिका शांता कुमारी म. सा. की दीक्षा जयंती का उल्लेख करते हुए कहा कि शांता कुमारी जी महाराज ने संथारा कर जैन शासन की प्रभावना की. उनकी तपस्या से युगों युगों तक मार्गदर्शन मिलता रहेगा.
साध्वी पुर्वाश्री महाराज सा ने Jain Sant के अवधनों की चर्चा करते हुए कहा कि चौथमल जी महाराज ने मानव जाति के लिए अनेको अवधान प्रदान किये थे. उन्होंने जैन शासन की एकता के लिए जी जान लगा दी थी. वे मानवता के मसीहा थे. उन्होंने उदारता के साथ गरीबो का भला किया. वे जैन शासन के तेजस्वी और देदीप्यमान संत थे. पुर्वाश्री महाराज ने शांता कुमारी जी महाराज सा के वात्सल्य भाव की सरहाना करते हुए कहा कि शांता कुमारी जी महाराज छोटी छोटी साध्वियों को वात्सल्य के साथ आगे बढ़ाने में निपुण साध्वी थे.
इस मोके पर जैन अजैन लोगों अच्छी उपस्थिति थी. श्रावको ने सेवा दर्शन का लाभ लिया. साध्वियों की पदयात्रा भी चल रही है.
Jain Sant की जयंती के बाद साध्वियों का विहार
साध्वी द्वय ने जैन संत की दीक्षा जयंती कार्यक्रम कर अगले दिन वर्धमान नगर से पद यात्रा करते हुए गुलाब नगर पधारी. गुलाब नगर में अशोक जी लुंकड के निवास स्थान पर प्रवास किया.